
हामके ना भुलाबा
तीन सव साल पहिले जे झारखंडीमन अपन घर-दूरा आउर देस छोइड़ के हिआँ से चइल गेलयँ ऊमन कहाँ हयँ? का करत हयँ? कोन हालइत में हयँ? ई केउ नि जानयँना। हमिन ऊमन के बिसराय जाय ही। जीवता हयँ कि मोइर गेलयँ। कोनो खबइर नखे। जोन परिया में ऊमन देस छोइड़ रहयँ से बेरा तो भेंट-घाँट करे कर कोनो जरिया नइ रहे। आइझ तो फोन, मोबाइल, फैक्स, ईमेल सबकुछ हय। तइयो परदेस में बस गेल संबंधीमन कर खोजखबइर लेवेक कर प्रयास नइ होवतहे। इके का कहल जाओ। जनकारी कर अभाव इया इयाइद कर कमजोरी?