कवर स्टोरी

हामके ना भुलाबा

तीन सव साल पहिले जे झारखंडीमन अपन घर-दूरा आउर देस छोइड़ के हिआँ से चइल गेलयँ ऊमन कहाँ हयँ? का करत हयँ? कोन हालइत में हयँ? ई केउ नि जानयँना। हमिन ऊमन के बिसराय जाय ही। जीवता हयँ कि मोइर गेलयँ। कोनो खबइर नखे।

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फ़रवरी 2010, वर्ष 4, अंक 1

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